ज्ञान गंगा: विद्यालयों का रुख नहीं कर रहे छात्र, नए संकट से जूझना पड़ रहा है शिक्षा विभाग को

Uttarakhand

देहरादून: कोरोना संक्रमण से हालत में सुधार होने के बाद प्रदेश में सभी विद्यालय खोल दिए गए हैं। कक्षा एक से पांचवीं तक प्राथमिक विद्यालय भी संचालित हो रहे हैं। आफलाइन पढ़ाई सुचारू होने के बाद विद्यालयों और शिक्षा विभाग को नए संकट से जूझना पड़ रहा है। विद्यालयों में पूरी क्षमता के साथ छात्र नहीं पहुंच रहे हैं। छात्रों और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति की जांच के लिए विभाग की ओर से कुछ स्थानों पर मुआयना किया गया तो यह जानकारी सामने आई।

अब बड़े स्तर पर विद्यालयों के निरीक्षण की पैरवी की जा रही है। इस बीच प्रदेश के 17 हजार सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिड डे मील योजना के अंतर्गत दिए जा रहे भोजन भत्ते की व्यवस्था बदली गई है। केवल विद्यालय आने वाले बच्चों को मिड डे मील के स्थान पर भोजन भत्ता मिलेगा। इससे विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा होगा।

सरकारी और सहायताप्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में नौवीं से 12वीं तक सामान्य ओर पिछड़ी जाति के छात्र-छात्राओं को भी नए शैक्षिक सत्र में निश्शुल्क पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी। प्रदेश सरकार ने निश्शुल्क पाठ्यपुस्तक देने का दायरा बढ़ा दिया है। इससे पहले कक्षा एक से आठवीं तक सभी छात्र-छात्राओं को पुस्तकें मिलती रही हैं। नौवीं से 12वीं तक सभी छात्राओं के साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें देने की व्यवस्था है। इन विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि देखते हुए नए सत्र से सामान्य और पिछड़े वर्गों के छात्रों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। एक लाख से ज्यादा छात्र इससे लाभान्वित हो सकेंगे। दरअसल सरकारी विद्यालयों में छात्रसंख्या लगातार गिर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी नजदीकी निजी विद्यालयों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के इस कदम से सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ विद्यालयों को भी राहत मिलेगी।

प्रदेश में चुनाव आचार संहिता खत्म होने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। विशेष रूप से शिक्षकों के संगठन एक-एक दिन गिनकर काट रहे हैं। शिक्षा विभाग से लेकर शासन स्तर तक तमाम कामकाज आचार संहिता के कारण लटके हुए हैं। एलटी से प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति में भी यही पेच है। करीब 1400 पदों पर पदोन्नति का प्रस्ताव राज्य लोक सेवा आयोग को भेजा जाना है। इससे पहले भी आयोग में शिक्षकों की पदोन्नति के लिए एक सूची भेजी जा चुकी है। इसमें लग रहे अड़ंगे को दूर करना है। शिक्षक संगठन लंबे समय से इस मामले में कसरत कर रहे हैं, लेकिन आचार संहिता आड़े आ गई। लिहाजा 10 मार्च को मतगणना का इंतजार है। इस दिन नई सरकार बनने का रास्ता भी साफ होगा, साथ में आचार संहिता भी खत्म हो जाएगी। शिक्षक नेताओं को भी राहत मिलेगी। आखिर नेतागीरी का रास्ता भी साफ होगा।

सरकारी माध्यमिक विद्यालयों की दशा और दिशा में सुधार की चिंता दिखाई देने लगी है। इसे ध्यान में रखकर ही राज्य में अटल उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना की गई। पहले चरण में 189 राजकीय इंटर कालेजों को अटल उत्कृष्ट विद्यालय बनाया जा चुका है। खास बात ये है कि ये विद्यालय उत्तराखंड बोर्ड के स्थान पर सीबीएसइ बोर्ड से संबद्ध किए गए हैं। सरकार ने इन विद्यालयों के नजदीकी प्राथमिक विद्यालयों को भी योजना के दायरे में लिया है। अब माध्यमिक विद्यालयों को उत्कृष्ट क्लस्टर सेंटर के तौर पर विकसित किया जाएगा। प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर सरकारी के साथ ही सहायताप्राप्त अशासकीय विद्यालयों इस योजना का हिस्सा बनेंगे। इन चयनित विद्यालयों को आवश्यक भौतिक संसाधनों से सरसब्ज किया जाएगा। ये विद्यालय बतौर माडल काम करेंगे। पहले चरण में हाईस्कूल और इंटर कालेजों को क्लस्टर सेंटर बनाने पर काम हो रहा है। जिलों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *